Tuesday, February 5, 2008

मैं हूँ खामोश..

मैं हूँ खामोश मेरे अल्फाज़ सुनो..
मेरी साँसों में गूंजती
अपनी आवाज़ की झंकार सुनो
मेरी आंखों में बसे ख्वाबों का
तुम हो फनकार सुनो
मेरे कमरे के कोने कोने में
अपनी पर्चियों की धड़कन सुनो
मेरे लडखडाते हुए कदमो में
अपनी मदहोशी के किस्से सुंनो
मेरे हर लव्ज़ में
अपने नाम की पुकार सुनो
मेरे टूटे हुए दिल में
अपनी धड़कने सुनो

मैं हूँ खामोश मेरे अल्फाज़ सुनो...
पंछियों की चेह्चाहात में
मेरी खिलखिलाती हसी सुनो
तन्हाइयों की रातों में
भीगी पलकों की सिसकियाँ सुनो
कांच के शीशे पर जमी बारिश की बूंदों की तरह
दबे हुए मासूम सवाल सुनो
खिलते हुए फूलों की खुशबू में
मेरी साँसों की सरगम सुनो
खितिज को छुटी लहरों में
मेरे तमन्नाओ के गीत सुनो'कहने को अब कुछ नही बाकि
मेरे दिल के जज्बाद सुनो

मैं हूँ खामोश मेरे अल्फाज़ सुनो...